“अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट इस शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन की वैश्विक टैरिफ नीति की वैधता पर फैसला सुना सकता है, जो भारत पर लगे 50% टैरिफ को रद्द कर सकता है। रूस ऑयल आयात पर विवाद के बीच चल रही अमेरिका-भारत ट्रेड डील वार्ता में यह फैसला बड़ा मोड़ ला सकता है, भारतीय निर्यातकों को राहत देते हुए द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का रास्ता साफ करेगा।”
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से ट्रंप की टैरिफ नीति पर फैसला इस शुक्रवार को आने की संभावना है। यह मामला International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ की वैधता पर केंद्रित है, जहां चुनौती दी गई है कि ये टैरिफ बिना कांग्रेस की मंजूरी के लगाए गए। अगर कोर्ट ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला देता है, तो वैश्विक टैरिफ रद्द हो सकते हैं, जिससे भारत जैसे देशों को बड़ी राहत मिलेगी।
भारत-अमेरिका ट्रेड संबंधों में 2025 से तनाव बढ़ा है, जब ट्रंप ने रूस से ऑयल आयात को लेकर भारत पर 50% टैरिफ थोप दिया। इससे भारतीय निर्यात में मई से नवंबर 2025 तक 20.7% की गिरावट आई, जबकि कुल द्विपक्षीय व्यापार 143 बिलियन डॉलर से बढ़कर 238 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद थी। हालांकि, नवंबर 2025 में निर्यात में 20% की उछाल देखी गई, जो विविधीकरण प्रयासों का नतीजा है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका को टैरिफ से 600 बिलियन डॉलर मिल रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे अतिरंजित बताते हैं।
ट्रेड डील वार्ता में भारत ने रूस ऑयल आयात कम करने का वादा किया है, जिससे मोदी सरकार ट्रंप से असंतुष्ट दिखी। ट्रंप ने कहा कि मोदी उनसे नाखुश हैं, लेकिन वार्ता जारी है। भारतीय दूतावास ने ट्रंप के सहयोगी की लॉबी फर्म को हायर किया है, ताकि ट्रेड टॉक्स, Operation Sindoor और द्विपक्षीय संबंधों पर फोकस किया जा सके। अगर सुप्रीम कोर्ट टैरिफ को अमान्य ठहराता है, तो रिफंड की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, जहां इंपोर्टर्स Court of International Trade में क्लेम दाखिल कर रहे हैं।
प्रमुख प्रभाव भारत पर
निर्यात हानि : 2025 में अमेरिका को भारतीय निर्यात का 70% हिस्सा प्रभावित हुआ, खासकर स्टील, एल्युमिनियम और टेक्सटाइल सेक्टर में। Goldman Sachs का अनुमान है कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर 0.6 प्रतिशत अंकों का असर पड़ा।
विविधीकरण रणनीति : भारत ने यूरोप और मिडिल ईस्ट में निर्यात बढ़ाया, जिससे ऑक्टोबर 2025 में गिरावट के बाद रिकवरी हुई।
ट्रेड लक्ष्य : दोनों देश 2025 के अंत तक ट्रेड वॉल्यूम 500 बिलियन डॉलर तक ले जाने पर सहमत हैं, लेकिन टैरिफ बाधा बने हुए हैं।
| सेक्टर | टैरिफ दर (2025 से) | प्रभावित निर्यात मूल्य (बिलियन डॉलर) | संभावित राहत अगर फैसला ट्रंप के खिलाफ |
|---|---|---|---|
| स्टील और एल्युमिनियम | 50% | 15 | रिफंड और निर्यात वृद्धि 25% तक |
| टेक्सटाइल | 25-50% | 20 | बाजार पहुंच में सुधार, 10% ग्रोथ |
| फार्मास्यूटिकल्स | 10-25% | 12 | लागत बचत, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी |
| ऑटोमोबाइल पार्ट्स | 50% | 8 | उत्पादन बढ़ोतरी, रोजगार सृजन |
| कुल | – | 55 | द्विपक्षीय व्यापार में 30% उछाल संभव |
यह फैसला ट्रंप की ‘America First’ नीति को झटका दे सकता है, क्योंकि IEEPA टैरिफ को राष्ट्रीय आपातकाल से जोड़ा गया था। अगर अमान्य हुए, तो अन्य देश जैसे चीन और यूरोपीय यूनियन भी राहत पा सकते हैं, लेकिन भारत के लिए यह ट्रेड डील को मजबूत करने का मौका होगा। ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ पॉज को अगस्त 2025 तक बढ़ाया था, लेकिन अब वार्ता में फ्रिक्शन बिंदु बने हुए हैं।
ट्रेड डील की प्रमुख मांगें
अमेरिका: भारत से रूस ऑयल आयात बंद करने और अमेरिकी हथियार, एनर्जी खरीद बढ़ाने की मांग।
भारत: टैरिफ हटाने, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स में छूट और कृषि सब्सिडी पर समझौता।
संभावित परिणाम: अगर कोर्ट फैसला ट्रंप के खिलाफ देता है, तो वार्ता तेज हो सकती है, जिससे ‘Mission 500’ लक्ष्य हासिल हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला वैश्विक व्यापार नीति को重新 परिभाषित करेगा, खासकर विकासशील देशों के लिए। भारत ने पहले ही निर्यात विविधीकरण शुरू कर दिया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्टों, विशेषज्ञ विश्लेषणों और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।