“भारत सरकार चीनी कंपनियों पर लगे 5 साल पुराने प्रतिबंध को हटाने पर विचार कर रही है, जिससे वे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स में बोली लगा सकेंगी। वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रहा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में सख्ती बनी रहेगी। इससे भारतीय कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है, जबकि व्यापार संबंधों में सुधार की उम्मीद जगी है।”
भारत सरकार चीनी कंपनियों को सरकारी ठेकों में भाग लेने की अनुमति देने की योजना बना रही है। वित्त मंत्रालय ने 2020 में लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव तैयार किया है, जो सीमा विवाद के बाद लागू हुए थे। सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव से चीनी फर्म्स बिना पूर्व अनुमति के सामान्य सरकारी निविदाओं में बोली लगा सकेंगी।
हालांकि, रक्षा, दूरसंचार और रेलवे जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध जारी रहेगा। इस फैसले का उद्देश्य अर्थव्यवस्था को गति देना और विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेक्टर में।
इस खबर के बाद भारतीय कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। L&T के शेयर 8% गिरे, जबकि BHEL में 10% की गिरावट दर्ज हुई। Siemens और ABB India के शेयरों में भी 5-7% की कमी आई, क्योंकि निवेशक चीनी प्रतिस्पर्धा से चिंतित हैं।
| प्रभावित सेक्टर | संभावित प्रभाव | उदाहरण कंपनियां |
|---|---|---|
| इंफ्रास्ट्रक्चर | लागत में कमी, लेकिन स्थानीय कंपनियों पर दबाव | Huawei, ZTE |
| मैन्युफैक्चरिंग | सस्ते उपकरणों की उपलब्धता | Xiaomi, Oppo |
| ऊर्जा | नई तकनीक का प्रवेश | BYD, CATL |
सरकार इस नीति में सुरक्षा जांच को मजबूत रखेगी, जहां हर बोली की समीक्षा होगी। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत-चीन व्यापार संबंधों को सामान्य करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, जो वर्तमान में $100 बिलियन से अधिक का है।
चीनी कंपनियां पहले से ही भारत में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में सक्रिय हैं, लेकिन सरकारी ठेकों से बाहर थीं। इस बदलाव से वे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और 5G नेटवर्क में योगदान दे सकेंगी, बशर्ते वे स्थानीय डेटा स्टोरेज नियमों का पालन करें।
प्रमुख बिंदु:
प्रतिबंध हटने से चीनी फर्म्स को सामान्य ठेकों में प्रवेश मिलेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा क्षेत्रों में कोई ढील नहीं।
भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जो उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद हो सकती है।
वित्त मंत्रालय जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय ले सकता है।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट सूत्रों पर आधारित है।