“भारत, सऊदी अरब और यूएई ने समुद्र के नीचे HVDC पावर केबल बिछाने की योजना बनाई है, जिससे 2 GW बिजली का आदान-प्रदान संभव होगा; कुल लागत 90,000 करोड़ रुपये, जिसमें सऊदी के लिए 1,700 किमी और UAE के लिए 1,600 किमी केबल शामिल; यह OSOWOG पहल का हिस्सा है जो हरित ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करेगा।”
भारत ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ मिलकर समुद्र के नीचे बिजली ट्रांसमिशन केबल बिछाने की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है, जो ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव लाएगी। इस गठबंधन से भारत मध्य पूर्व से सौर ऊर्जा आयात कर सकेगा, जबकि वहां भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा निर्यात होगी। परियोजना HVDC तकनीक पर आधारित है, जो लंबी दूरी पर कम नुकसान के साथ बिजली हस्तांतरित करती है।
सऊदी अरब के साथ 1,700 किलोमीटर लंबी केबल राजस्थान से शुरू होकर अरब सागर के रास्ते जुड़ेगी, जबकि UAE के लिए 1,600 किलोमीटर की केबल गुजरात तट से चलेगी। दोनों केबल्स की क्षमता 2 GW प्रत्येक है, जो सालाना करोड़ों यूनिट बिजली का आदान-प्रदान संभव बनाएगी। इसकी कुल अनुमानित लागत 90,000 करोड़ रुपये है, जिसमें सऊदी लिंक के लिए 47,000 करोड़ और UAE लिंक के लिए 43,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।
यह परियोजना One Sun One World One Grid (OSOWOG) पहल का विस्तार है, जो वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा ग्रिड बनाने का लक्ष्य रखती है। भारत की सस्ती सौर ऊर्जा सऊदी और UAE के बाजारों तक पहुंचेगी, जबकि उनके विशाल सौर फार्म भारत की रात्री ऊर्जा जरूरतें पूरी करेंगे। इससे कार्बन उत्सर्जन में 20-30% कमी आने की उम्मीद है।
परियोजना के प्रमुख लाभ
ऊर्जा सुरक्षा : भारत को मध्य पूर्व से स्थिर बिजली आपूर्ति मिलेगी, जो तेल आयात पर निर्भरता कम करेगी।
आर्थिक विकास : निर्यात से भारत को सालाना 5,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है, साथ ही केबल निर्माण से 10,000 नौकरियां सृजित होंगी।
पर्यावरण प्रभाव : हरित ऊर्जा आदान-प्रदान से 2030 तक 50 मिलियन टन CO2 उत्सर्जन कम होगा।
तकनीकी उन्नति : HVDC केबल्स से भारत की ग्रिड क्षमता 15% बढ़ेगी, जो 5G और EV चार्जिंग नेटवर्क को सपोर्ट करेगी।
| परियोजना विवरण | सऊदी अरब लिंक | UAE लिंक |
|---|---|---|
| लंबाई (किमी) | 1,700 | 1,600 |
| लागत (करोड़ रुपये) | 47,000 | 43,000 |
| क्षमता (GW) | 2 | 2 |
| निर्माण समयरेखा | 2027 तक पूरा | 2026 तक चरणबद्ध |
| मुख्य लाभ | सौर ऊर्जा आयात | नवीकरणीय निर्यात |
इस गठबंधन से भारत की ऊर्जा नीति में बदलाव आएगा, जहां 2035 के बाद नए कोयला प्लांट नहीं बनाए जाएंगे। सऊदी और UAE के साथ समझौते से क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ेगी, जो IMEC कॉरिडोर का पूरक बनेगा। परियोजना के लिए अंतरराष्ट्रीय फंडिंग जुटाई जा रही है, जिसमें ADB और World Bank शामिल हो सकते हैं।
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