“केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में E20 पेट्रोल (20% एथनॉल ब्लेंड) को अनिवार्य कर दिया है, जिसमें न्यूनतम 95 RON होना जरूरी होगा। यह कदम तेल आयात घटाने, प्रदूषण कम करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में है। साथ ही, सरकार E50 (50% एथनॉल ब्लेंड) जैसे उच्च ब्लेंड फ्यूल की ओर तेजी से बढ़ रही है, जिसके लिए उत्पादन क्षमता और वाहन अनुकूलता पर काम चल रहा है।”
1 अप्रैल से E20 पेट्रोल अनिवार्य, E50 की तैयारी में सरकार
पेट्रोलियम मंत्रालय ने 17 फरवरी को जारी अधिसूचना के तहत सभी तेल विपणन कंपनियों को निर्देश दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में पेट्रोल पंपों पर केवल E20 पेट्रोल ही उपलब्ध होगा। यह पेट्रोल अधिकतम 20% एथनॉल से मिश्रित होगा और इसका रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) कम से कम 95 होना अनिवार्य है। BIS (Bureau of Indian Standards) के निर्धारित मानकों के अनुसार यह फ्यूल सप्लाई किया जाएगा।
यह बदलाव भारत की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पहले E20 का रोलआउट चरणबद्ध तरीके से हो रहा था, लेकिन अब यह पूर्ण रूप से अनिवार्य हो गया है। विशेष परिस्थितियों में कुछ क्षेत्रों या सीमित समय के लिए छूट मिल सकती है, लेकिन सामान्य स्थिति में E20 ही मानक ईंधन होगा।
E20 पेट्रोल के फायदे और प्रभाव
पर्यावरणीय लाभ : E20 फ्यूल टेलपाइप से कार्बन उत्सर्जन को लगभग 30% तक कम कर सकता है, क्योंकि एथनॉल ऑक्सीजन युक्त होता है और बेहतर दहन सुनिश्चित करता है।
ऑक्टेन रेटिंग में सुधार : 95 RON के साथ इंजन में नॉकिंग (खटखटाहट) कम होगी, जिससे इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर रहेगी और उच्च कंप्रेशन रेशियो वाले इंजन सुरक्षित चलेंगे।
माइलेज पर असर : अधिकांश अध्ययनों के अनुसार E20 से माइलेज 3-7% तक घट सकता है, खासकर पुराने वाहनों में जहां फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम E20 के लिए पूरी तरह अनुकूलित नहीं हैं।
इंजन और कंपोनेंट्स पर प्रभाव : 2023 के बाद बने अधिकांश वाहन E20 कम्पैटिबल हैं। पुराने वाहनों (खासकर 2010 से पहले के) में रबर सील, होज और फ्यूल लाइन्स पर ज्यादा घिसाव हो सकता है। लंबे समय तक फ्यूल स्टोरेज से बचें, क्योंकि एथनॉल नमी सोख सकता है।
कीमत : E20 पेट्रोल की कीमत सामान्य पेट्रोल से थोड़ी अधिक हो सकती है, अनुमानित 97-106 रुपये प्रति लीटर के बीच, लेकिन तेल आयात में बचत से कुल अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।
E50 की ओर तेज कदम: सरकार की तैयारी
सरकार अब E20 से आगे बढ़कर उच्च ब्लेंड फ्यूल जैसे E50 पर फोकस कर रही है। इथेनॉल उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं:
चीनी मिलों और डिस्टिलरी में निवेश बढ़ाया गया है, जिसमें गन्ने के रस, मोलासेस और अनाज से एथनॉल बनाया जा रहा है।
2025-26 सीजन के लिए एथनॉल उत्पादन पर कोई मात्रात्मक प्रतिबंध नहीं है, जिससे क्षमता 9,000 मिलियन लीटर से अधिक हो गई है।
इंडस्ट्री एसोसिएशन ने E27 तक ब्लेंडिंग का सुझाव दिया है और सरकार रोडमैप तैयार कर रही है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (जो E20 से E85 तक चल सकें) के लिए स्टैंडर्ड्स अपडेट हो रहे हैं, और 2024 से ऐसे वाहनों का उत्पादन बढ़ेगा।
सेकंड-जनरेशन एथनॉल (2G) प्लांट्स पर जोर, जैसे कृषि अवशेष से एथनॉल, ताकि फूड सिक्योरिटी प्रभावित न हो।
वाहन मालिकों के लिए सलाह
अपनी गाड़ी का ओनर मैनुअल चेक करें कि वह E20 कम्पैटिबल है या नहीं।
अगर वाहन पुराना है तो नियमित सर्विसिंग बढ़ाएं, खासकर फ्यूल सिस्टम की।
E50 जैसे उच्च ब्लेंड आने पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ही सुरक्षित विकल्प होंगे, इसलिए नई गाड़ी खरीदते समय E20+ कम्पैटिबिलिटी देखें।
सरकार की योजना से किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी, क्योंकि गन्ना और अनाज का उपयोग बढ़ेगा।