कोल इंडिया के शेयर में जबरदस्त उछाल, कनाडा के साथ साझेदारी से मिला बड़ा बूस्ट; रेयर अर्थ एलिमेंट्स समेत क्रिटिकल मिनरल्स पर होगा काम

“कोल इंडिया लिमिटेड के शेयरों में हालिया दिनों में शानदार तेजी देखी गई है, जो कनाडा के साथ रणनीतिक साझेदारी की खबरों से समर्थित है। कंपनी के चेयरमैन ने कनाडाई पीएम से मुलाकात की, जिसमें क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, कोकिंग कोल और सस्टेनेबल माइनिंग पर सहयोग पर चर्चा हुई। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा और शेयर 3-4% तक चढ़कर 450-458 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। यह साझेदारी भारत की EV, सेमीकंडक्टर और क्लीन एनर्जी जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है।”

कोल इंडिया के शेयर में शानदार तेजी, कनाडा के साथ साझेदारी से मिला सपोर्ट; मिलकर रेयर अर्थ समेत इन चीजों पर करेंगे काम

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के शेयरों में लगातार तेजी जारी है, जो हालिया कनाडा के साथ रणनीतिक चर्चाओं और संभावित साझेदारी से मजबूती पकड़ रही है। BSE और NSE पर शेयर ने 440 रुपये के आसपास खुलते हुए 458 रुपये तक का उच्च स्तर छुआ, जिसमें 3-4% की इंट्राडे बढ़त दर्ज की गई। पिछले सत्र के क्लोजिंग 435 रुपये से यह स्तर काफी ऊपर है, जबकि 52-सप्ताह का उच्चतम स्तर 461 रुपये के करीब पहुंच चुका है।

यह तेजी मुख्य रूप से कंपनी के चेयरमैन बी. साईराम की कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाकात से जुड़ी है। फरवरी अंत से मार्च शुरुआत में भारत दौरे पर आए कार्नी के साथ उच्च स्तरीय वार्ता में क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, कोकिंग कोल एसेट्स, मिनरल प्रोसेसिंग और सस्टेनेबल माइनिंग इनिशिएटिव्स पर फोकस रहा। CIL ने स्पष्ट रूप से कनाडा में क्रिटिकल मिनरल एसेट्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स में निवेश और सहयोग की इच्छा जताई है।

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यह साझेदारी भारत-कनाडा के बीच हाल के समझौतों से जुड़ी है, जिसमें क्रिटिकल मिनरल्स वैल्यू चेन पर MoU शामिल है। कनाडा को विश्वसनीय स्रोत के रूप में देखा जा रहा है, खासकर चीन पर निर्भरता कम करने के लिए। भारत की EV बैटरी, विंड टरबाइन, सोलर पैनल और डिफेंस सेक्टर की मांग को देखते हुए रेयर अर्थ एलिमेंट्स की जरूरत बढ़ रही है। कनाडा के साथ यह कदम सप्लाई चेन को डाइवर्सिफाई करेगा और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करेगा।

कोल इंडिया पहले से ही रेयर अर्थ एलिमेंट्स में सक्रिय है। कंपनी की सहायक साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने खनन अवशेषों (डंप्स) के सात स्थानों की पहचान की है, जहां दुर्लभ खनिजों की खोज संभव है। इसके अलावा, कंपनी घरेलू स्तर पर IREL और हिंदुस्तान कॉपर जैसी कंपनियों के साथ सहयोग कर रही है, जबकि ग्लोबल स्तर पर ऑस्ट्रेलिया, रूस, अर्जेंटीना, चिली और अफ्रीकी देशों में पार्टनरशिप तलाश रही है। कनाडा के साथ नई चर्चा इस रणनीति को और मजबूत बनाएगी।

मार्केट में निवेशकों का रुझान सकारात्मक है क्योंकि CIL की विविधीकरण रणनीति कंपनी को कोयला उत्पादन से आगे क्लीन एनर्जी और हाई-टेक मटेरियल्स की ओर ले जा रही है। हाल के महीनों में कंपनी की इकाई भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) का सफल मार्केट डेब्यू और IPO भी निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा दे रहा है।

क्रिटिकल मिनरल्स पर फोकस से CIL की वैल्यूएशन में सुधार की संभावना है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 2.8 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है, और डिविडेंड यील्ड आकर्षक बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि कनाडा जैसे विश्वसनीय पार्टनर के साथ साझेदारी से लॉन्ग-टर्म ग्रोथ ड्राइवर्स मजबूत होंगे, खासकर भारत के 2030 तक न्यूक्लियर और रिन्यूएबल एनर्जी टारगेट्स को देखते हुए।

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यह विकास भारत की आत्मनिर्भरता अभियान से भी जुड़ा है, जहां क्रिटिकल मिनरल्स को रणनीतिक महत्व दिया जा रहा है। कनाडा के साथ सहयोग से न सिर्फ सप्लाई सिक्योर होगी, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जॉइंट वेंचर के अवसर भी खुलेंगे।

Disclaimer: यह लेख बाजार की स्थितियों, उपलब्ध जानकारी और रुझानों पर आधारित है। निवेश से पहले अपनी जांच और विशेषज्ञ सलाह लें।

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