“ईरान संकट के लंबे खिंचने से भारतीय तेल विपणन कंपनियां (OMCs) जैसे IOC, BPCL, HPCL और गैस कंपनी GAIL पर नकदी प्रवाह का दबाव बढ़ेगा। फिच रेटिंग्स ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की लंबी बंदी या तेल कीमतों में निरंतर उछाल से इन कंपनियों के क्रेडिट मेट्रिक्स प्रभावित होंगे, हालांकि सरकारी समर्थन से रेटिंग्स बनी रहेंगी। ब्रेंट क्रूड अब 91-93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जिससे आयात बिल बढ़ रहा है और घरेलू गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है।”
ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के लंबे समय तक जारी रहने की स्थिति में भारतीय तेल और गैस क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां गंभीर चुनौतियों का सामना कर सकती हैं। फिच रेटिंग्स ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की विस्तारित बंदी या तेल-गैस आपूर्ति में निरंतर व्यवधान से OMCs और GAIL के नकदी प्रवाह पर दबाव पड़ेगा।
वर्तमान में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 91-93 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच चुकी है, जो पिछले कुछ दिनों में तेज उछाल दर्शाती है। भारत अपनी कुल क्रूड जरूरत का लगभग 88-90% आयात करता है, जिसमें से करीब 50% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। मुख्य आपूर्तिकर्ता देशों में इराक, सऊदी अरब, UAE और कुवैत शामिल हैं। संकट के कारण टैंकर मूवमेंट लगभग ठप हो गया है, जिससे वैकल्पिक स्रोतों से खरीदारी बढ़ रही है लेकिन फ्रेट चार्जेस और इंश्योरेंस प्रीमियम में भारी वृद्धि हो रही है।
फिच के अनुसार, यदि ब्रेंट क्रूड कीमतें एक तिमाही तक 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं और रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ने के बावजूद मार्केटिंग लाभ नहीं मिलता, तो OMCs के FY27 में EBITDA नेट लेवरेज 0.4x से 0.6x तक बढ़ सकता है। इससे इन कंपनियों के स्टैंडअलोन क्रेडिट प्रोफाइल पर असर पड़ेगा। हालांकि, मजबूत सरकारी जुड़ाव और राज्य समर्थन के कारण रेटिंग्स में तत्काल बदलाव की संभावना कम है।
GAIL के मामले में स्थिति और जटिल है। कंपनी की LNG आपूर्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा मध्य पूर्व से आता है। फिच का अनुमान है कि यदि मध्य पूर्वी LNG सप्लाई का एक चौथाई हिस्सा एक तिमाही के लिए कट जाता है, तो GAIL का डेट-टू-अर्निंग्स रेशियो FY27 तक 2.5 गुना तक पहुंच सकता है। दो तिमाही के व्यवधान पर यह 3.0 गुना तक जा सकता है, क्योंकि वॉल्यूम कम होने और वर्किंग कैपिटल की जरूरत बढ़ने से प्रभाव पड़ता है।
भारत LPG का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है, जिसमें दो-तिहाई जरूरत आयात से पूरी होती है। संकट के कारण घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए रिफाइनरियों को निर्देश दिए गए हैं, लेकिन व्यावसायिक उपयोग (रेस्टोरेंट, होटल) के लिए आपूर्ति में कमी आ रही है। इससे LPG कीमतों में एक साल बाद पहली बार बढ़ोतरी हुई है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने से व्यावसायिक क्षेत्र प्रभावित हो रहा है, जिसके चलते इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकिंग अप्लायंसेज की मांग बढ़ी है।
प्रमुख प्रभाव और आंकड़े
क्रूड आयात पर निर्भरता : भारत प्रतिदिन लगभग 5 मिलियन बैरल क्रूड आयात करता है, जिसमें 50% से अधिक होर्मुज रूट से।
LNG और LPG प्रभाव : LNG आयात का 68% और LPG का 91% से अधिक हिस्सा क्षेत्र से प्रभावित।
रणनीतिक भंडार : भारत के पास स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से 9-10 दिनों की आपूर्ति और कुल मिलाकर 64.5 दिनों के बराबर स्टोरेज है, जो अल्पकालिक राहत दे सकता है।
वैकल्पिक स्रोत : रूस, अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका से खरीद बढ़ रही है, लेकिन लागत अधिक है।
आर्थिक प्रभाव : उच्च तेल कीमतें CAD को 0.4-0.5% तक बढ़ा सकती हैं, मुद्रास्फीति पर दबाव डाल सकती हैं और रुपए को कमजोर कर सकती हैं।
OMCs और GAIL के लिए चुनौतियां
उच्च इनपुट लागत : क्रूड और फीडस्टॉक महंगा होने से रिफाइनिंग और गैस प्रोसेसिंग लागत बढ़ेगी।
वर्किंग कैपिटल दबाव : आयात बिल बढ़ने से नकदी की जरूरत बढ़ेगी।
मार्जिन संपीड़न : यदि घरेलू ईंधन कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं, तो अंडर-रिकवरी बढ़ेगी।
सरकारी हस्तक्षेप : सरकार अतीत में कीमतों को नियंत्रित कर सब्सिडी दे चुकी है, लेकिन लंबे समय तक यह लाभप्रदता प्रभावित कर सकता है।
यदि संकट कुछ तिमाहियों से अधिक खिंचता है, तो कंपनियों को क्रेडिट मेट्रिक्स में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि सरकारी लिंकेज मजबूत बफर प्रदान करते हैं। भारत को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए रूस जैसे स्रोतों पर निर्भरता बढ़ानी होगी और रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस करना होगा।
Disclaimer : यह लेख समाचार और विश्लेषण पर आधारित है। निवेश संबंधी कोई सलाह नहीं है।