“संघ बजट 2026 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़े प्रोत्साहन की उम्मीद है, जिसमें ₹23,000 करोड़ की नई सब्सिडी स्कीम्स शामिल हो सकती हैं। उद्यमी आयात निर्भरता, उल्टे ड्यूटी स्ट्रक्चर और जीएसटी से जुड़ी वर्किंग कैपिटल समस्याओं का हवाला देते हुए टैक्स रिलैक्सेशन, पीएलआई विस्तार और सरलीकृत कंप्लायंस की मांग कर रहे हैं। सेमीकंडक्टर, बैटरी और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता पर फोकस रह सकता है, जो 2032 तक भारत को ग्लोबल हब बनाने में मदद करेगा।”
बजट में मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बड़ा बूस्टर डोज? उद्यमियों ने बताईं समस्याएं, सरकार से की ये खास मांग
संघ बजट 2026 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार पीएलआई स्कीम को और विस्तार देगी, खासकर सेमीकंडक्टर, लिथियम-आयन बैटरी और ऑटोमोटिव सेक्टर में। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि घरेलू उत्पादन में 25% तक की वृद्धि हो सकती है। हालिया सर्वे में 70% से ज्यादा उद्यमियों ने कहा कि बूस्टर डोज से जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान 14% से बढ़कर 25% तक पहुंच सकता है।
उद्योग की प्रमुख समस्याएं
उद्यमियों ने बजट से पहले अपनी चुनौतियां गिनाईं। सबसे बड़ी समस्या उल्टा ड्यूटी स्ट्रक्चर है, जहां कच्चे माल पर ज्यादा इम्पोर्ट ड्यूटी लगती है, जबकि फिनिश्ड प्रोडक्ट्स पर कम। इससे घरेलू मैन्युफैक्चरर्स की लागत 15-20% तक बढ़ जाती है। जीएसटी में भी दिक्कतें हैं, जहां मैन्युफैक्चरर्स को टैक्स पहले जमा करना पड़ता है, लेकिन पेमेंट्स महीनों बाद मिलते हैं, जिससे वर्किंग कैपिटल फंस जाता है। ग्लोबल अनिश्चितताओं जैसे ट्रेड टैरिफ और सप्लाई चेन डिसरप्शन ने ऑटो कंपोनेंट्स इम्पोर्ट को $20 बिलियन तक पहुंचा दिया है। एसएमई सेक्टर में स्किल्ड मैनपावर की कमी है, जहां 141,000 नई जॉब्स क्रिएट करने की जरूरत है, लेकिन ट्रेनिंग प्रोग्राम्स अपर्याप्त हैं।
उद्यमियों की खास मांगें
उद्यमी सरकार से टार्गेटेड इंसेंटिव्स की मांग कर रहे हैं। इनमें नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए टैक्स रिलैक्सेशन, जैसे 80% डेप्रिशिएशन बेनिफिट्स पहले साल में, और जीएसटी को कैश रियलाइजेशन बेसिस पर शिफ्ट करना शामिल है। पीएलआई स्कीम को स्पेस टेक, एआई और रोबोटिक्स तक बढ़ाने की मांग है, जिससे ₹1.1 ट्रिलियन का इन्वेस्टमेंट आकर्षित हो सकता है। कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट के लिए ₹14,000-16,000 करोड़ की सब्सिडी स्कीम की उम्मीद है, जो हाई-एंड मशीनरी जैसे टीबीएम और क्रेन्स में आत्मनिर्भरता लाएगी। ऑटो सेक्टर में ईवी और मोबाइल बैटरी पर ड्यूटी एग्जेम्प्शन बढ़ाने की बात है। एसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी बढ़ाकर कंप्लायंस बोझ कम करना भी जरूरी है।
संभावित बजट घोषणाएं और उनके प्रभाव
बजट में ₹23,000 करोड़ की नई मैन्युफैक्चरिंग सब्सिडी स्कीम्स की घोषणा हो सकती है, जिसमें कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट पर फोकस रहेगा। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर बूम में आयात पर निर्भरता 30% कम हो सकती है। सेमीकंडक्टर सेक्टर में दूसरी वेव ऑफ स्कीम्स आएंगी, जहां माइक्रोन, टाटा और केन्स जैसे प्रोजेक्ट्स 2026 से प्रोडक्शन शुरू करेंगे। सरकार का लक्ष्य 2032 तक दुनिया के टॉप फोर सेमीकंडक्टर हब बनना है। बैटरी इकोसिस्टम और ऑटो सेक्टर में ₹7,000 करोड़ की अतिरिक्त सपोर्ट से ईवी प्रोडक्शन 50% बढ़ सकता है। कैपिटल गुड्स में हाई-टेक ऑटो पार्ट्स और प्रिसीजन टूल्स पर इंसेंटिव्स से एक्सपोर्ट्स $1.3 ट्रिलियन तक पहुंच सकते हैं।
सेक्टर-वाइज इंसेंटिव्स की डिटेल्स
नीचे दी गई टेबल में प्रमुख सेक्टर्स और उनकी संभावित बजट सपोर्ट को दिखाया गया है:
| सेक्टर | संभावित इंसेंटिव्स | अपेक्षित प्रभाव |
|---|---|---|
| सेमीकंडक्टर | पीएलआई विस्तार, ₹1 बिलियन इंफ्रा सपोर्ट | 2032 तक ग्लोबल टॉप हब, 4 कंपनियां 2026 से प्रोडक्शन |
| बैटरी और ईवी | ड्यूटी एग्जेम्प्शन, ₹7,000 करोड़ सब्सिडी | आयात कम, ईवी प्रोडक्शन 50% वृद्धि |
| कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट | ₹14,000-16,000 करोड़ कैपेक्स सब्सिडी | हाई-एंड मशीनरी में आत्मनिर्भरता, जॉब्स क्रिएशन |
| ऑटो कंपोनेंट्स | उल्टे ड्यूटी स्ट्रक्चर फिक्स, जीएसटी रिफॉर्म | $20 बिलियन इम्पोर्ट कट, एक्सपोर्ट बूस्ट |
| स्पेस टेक और एआई | नई स्कीम्स, टैक्स इंसेंटिव्स | इनोवेशन बढ़ावा, ₹10.34 ट्रिलियन प्रोडक्शन |
ये इंसेंटिव्स न केवल घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देंगे, बल्कि ग्लोबल वैल्यू चेन्स में भारत की पोजिशन मजबूत करेंगे।
एसएमई और इनोवेशन पर फोकस
एसएमई सेक्टर, जो मैन्युफैक्चरिंग का 45% हिस्सा है, को बड़े राहत पैकेज की जरूरत है। उद्यमी मांग कर रहे हैं कि क्रेडिट गारंटी स्कीम को ₹5 लाख करोड़ तक बढ़ाया जाए, ताकि वर्किंग कैपिटल की समस्या हल हो। इनोवेशन के लिए आरएंडडी ग्रांट्स बढ़ाने की बात है, जहां एआई और रोबोटिक्स में टैक्स इंसेंटिव्स से 141,000 स्किल्ड जॉब्स क्रिएट होंगी। ग्रिड रेडीनेस और एनर्जी स्टोरेज में फिस्कल सपोर्ट से रिन्यूएबल एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट मिलेगा।
स्टेट-वाइज इंसेंटिव्स का ओवरव्यू
विभिन्न राज्यों में पहले से चल रही स्कीम्स बजट के साथ मिलकर मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करेंगी। उदाहरण के लिए:
गुजरात: सेमीकंडक्टर के लिए 70% कैपेक्स सपोर्ट, धोलेरा में 75% लैंड सब्सिडी।
तमिलनाडु: ईवी पर 100% एसजीएसटी रिफंड, 15-20% कैपेक्स सब्सिडी।
उत्तर प्रदेश: बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए 10 साल जीएसटी छूट, पावर ₹2/यूनिट।
कर्नाटक: एयरोस्पेस में 25% कैपेक्स या 2.5% पीएलआई चॉइस।
महाराष्ट्र: 100% कैपेक्स इंसेंटिव्स, स्टैंप ड्यूटी वेवर।
ये राज्य-स्तरीय प्रयास केंद्रीय बजट के साथ मिलकर 10x जॉब्स क्रिएट कर सकते हैं।
ग्लोबल चैलेंजेस और भारत की रणनीति
ग्लोबल ट्रेड टेंशन्स जैसे यूएस टैरिफ वार्निंग्स के बीच, बजट में एक्सपोर्ट इंसेंटिव्स बढ़ाने की उम्मीद है। मैन्युफैक्चरिंग को डिजिटल ग्रोथ से जोड़कर स्मार्ट प्लांट्स विकसित करने पर जोर रहेगा। क्रिटिकल मिनरल्स एक्सेस और डोमेस्टिक रिन्यूएबल मैन्युफैक्चरिंग से एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी। कुल मिलाकर, बजट विकसित भारत 2047 के विजन को सपोर्ट करेगा, जहां मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट्स $1 ट्रिलियन तक पहुंच सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सामान्य जानकारी पर आधारित है और किसी भी निवेश या व्यावसायिक निर्णय के लिए सलाह नहीं है। सूचनाएं विभिन्न स्रोतों से संकलित हैं, लेकिन इनकी सटीकता की गारंटी नहीं दी जाती। पाठक अपनी जिम्मेदारी पर कार्य करें।