“भारत ने चीन से आयात होने वाले एथिल क्लोरोफॉर्मेट पर एंटी-डंपिंग जांच शुरू की है, जो फार्मास्यूटिकल और एग्रोकेमिकल उद्योग में इस्तेमाल होता है। Paushak Ltd की शिकायत पर DGTR ने जांच शुरू की, जिसमें चीनी निर्यातकों द्वारा अनुचित रूप से कम कीमत पर बेचे जाने का आरोप है। इससे घरेलू उत्पादकों को भारी नुकसान हो रहा है और यदि डंपिंग साबित हुई तो ड्यूटी लगने से चीन की भारत में निर्यात कमाई पर बड़ा असर पड़ेगा। हाल के महीनों में कई ऐसे उत्पादों पर जांच और ड्यूटी से भारत का व्यापार संतुलन मजबूत करने की कोशिश तेज हुई है।”
चीन के खिलाफ भारत ने बैठाई जांच, निर्यात से हो रही तगड़ी कमाई पर ड्रैगन को लगने वाली है बड़ी चोट!
भारत सरकार ने चीन से आयात होने वाले महत्वपूर्ण केमिकल एथिल क्लोरोफॉर्मेट (Ethyl Chloroformate) पर एंटी-डंपिंग जांच शुरू कर दी है। यह कदम घरेलू उद्योग को सस्ते आयात से बचाने के लिए उठाया गया है, जिससे चीन की भारत बाजार में तगड़ी कमाई पर ब्रेक लग सकता है।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) ने 18 मार्च 2026 को इस जांच की शुरुआत की। जांच Paushak Ltd की याचिका पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि चीन से यह केमिकल अनुचित रूप से कम कीमतों पर डंप किया जा रहा है। इससे भारतीय उत्पादकों को सामग्री नुकसान (material injury) हो रहा है, जिसमें बाजार हिस्सेदारी घटना, लाभ में कमी और कीमतों पर दबाव शामिल है।
एथिल क्लोरोफॉर्मेट फार्मास्यूटिकल्स और एग्रोकेमिकल्स के निर्माण में इंटरमीडिएट के रूप में इस्तेमाल होता है। भारत में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सस्ते चीनी आयात से लोकल मैन्युफैक्चरर्स प्रभावित हो रहे हैं। जांच की अवधि अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 तक की है, जिसमें निर्यातकों, आयातकों और अन्य पक्षों से सबूत मांगे गए हैं।
यदि जांच में डंपिंग और नुकसान साबित होता है, तो भारत एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा सकता है, जो आयात की कीमत बढ़ाएगी और घरेलू उत्पादकों को राहत देगी। इससे चीन की भारत में इस उत्पाद की निर्यात कमाई पर सीधा असर पड़ेगा।
यह जांच अकेली नहीं है। हाल के महीनों में DGTR ने चीन से कई उत्पादों पर जांच तेज की है:
नायलॉन-6 चिप्स और ग्रेन्यूल्स (Nylon-6) पर चीन और रूस से आयात की जांच, जहां Gujarat Polyfilms ने डंपिंग का आरोप लगाया।
हेलो-आइसोब्यूटीन-आइसोप्रीन रबर (HIIR या Halobutyl Rubber) पर चीन, सिंगापुर और अमेरिका से जांच।
अन्य केमिकल्स और स्टील उत्पादों पर पहले से ड्यूटी लगाई जा चुकी है, जैसे कोल्ड-रोल्ड नॉन-ओरिएंटेड इलेक्ट्रिकल स्टील पर $223.82 से $415 प्रति टन तक और R-134a रेफ्रिजरेंट गैस पर $5,251 प्रति टन तक की ड्यूटी (दिसंबर 2025 में लागू)।
ये कदम भारत के व्यापार रक्षा उपायों का हिस्सा हैं, जिनसे चीन के साथ व्यापार घाटा ($99-102 बिलियन के आसपास FY 2025-26 में) कम करने की कोशिश हो रही है। चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, केमिकल्स और अन्य इनपुट्स का आयात बढ़ता जा रहा है, जबकि निर्यात सीमित है।
एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगने से:
घरेलू उद्योगों में उत्पादन बढ़ेगा और रोजगार सृजन होगा।
फार्मा और एग्रोकेमिकल सेक्टर में लागत स्थिर रहेगी, लेकिन लंबे समय में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
चीन के निर्यातकों को भारत बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं या बाजार हिस्सा गंवाना पड़ सकता है।
भारत सरकार का फोकस लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर है। ऐसे में ये जांचें और ड्यूटी चीनी निर्यात पर दबाव बढ़ा रही हैं, जिससे ड्रैगन की तगड़ी कमाई प्रभावित हो सकती है। जांच पूरी होने पर अंतिम फैसला DGTR की सिफारिश और वित्त मंत्रालय की अधिसूचना पर निर्भर करेगा।