जनवरी 2026 में भारत ने रूस से लगभग 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम स्तर है और कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी घटकर 21.2% रह गई। कुल रूसी माल आयात 40.48% गिरकर 2.86 अरब डॉलर हो गया, मुख्यतः कच्चे तेल की खरीद में कटौती से। अमेरिका के दावे के बावजूद कि भारत ने रूसी तेल खरीद बंद करने का वादा किया है, रूस की विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत ने अपना रुख नहीं बदला है और यह व्यापार दोनों देशों के लिए फायदेमंद है।
जनवरी में तेल आयात 3 साल में सबसे कम, फिर भी रूस ने अमेरिकी दावे को किया रिजेक्ट; कहा- भारत ने नहीं बदला रुख
जनवरी 2026 में भारत के रूस से कच्चे तेल के आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो तीन साल से अधिक समय में सबसे निचला स्तर है। उद्योग स्रोतों और ट्रेड डेटा के अनुसार, भारत ने पिछले महीने औसतन 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) रूसी क्रूड आयात किया, जो दिसंबर 2025 की तुलना में 23.5% कम और पिछले साल की समान अवधि से लगभग एक-तिहाई कम है। यह स्तर नवंबर 2022 के बाद सबसे कम है, जबकि रूस की कुल भारतीय तेल आयात में हिस्सेदारी घटकर 21.2% रह गई, जो अक्टूबर 2022 के बाद न्यूनतम है।
इस गिरावट के बावजूद रूस ने अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में कहा कि मॉस्को को कोई कारण नहीं दिखता कि भारत ने रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदने के अपने रुख में बदलाव किया हो। उन्होंने जोर दिया कि भारत का रूसी तेल खरीदना दोनों देशों के लिए लाभदायक है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का हवाला देते हुए कहा था कि भारत ने रूसी क्रूड की खरीद प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बंद करने का वादा किया है। भारत सरकार ने इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है, लेकिन रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर देते हुए ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता बताई है।
आंकड़ों के अनुसार, भारत का रूस से कुल माल आयात जनवरी में 40.48% घटकर 2.86 अरब डॉलर रह गया, जबकि जनवरी 2025 में यह 4.81 अरब डॉलर था। इसमें कच्चे तेल का हिस्सा करीब 80% रहा, जिसकी वजह से रूसी क्रूड आयात का मूल्य अनुमानित रूप से 2.3 अरब डॉलर या इससे कम रहा। कुल तेल आयात में वृद्धि के बावजूद रूसी हिस्सेदारी घटी क्योंकि मध्य पूर्व, दक्षिण अमेरिका और अमेरिका से आपूर्ति बढ़ी है। मध्य पूर्वी देशों की हिस्सेदारी इस दौरान सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गई।
यह बदलाव अमेरिकी दबाव और व्यापार समझौते से जुड़ा दिखता है। फरवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने भारत पर लगे 25% अतिरिक्त टैरिफ हटा दिए, जिसे ट्रंप ने रूसी तेल खरीद कम करने के बदले बताया। हालांकि, भारतीय रिफाइनरियां पहले से ही रूसी क्रूड से दूरी बना रही हैं। फरवरी में औसतन 1-1.2 मिलियन bpd और मार्च में करीब 800,000 bpd तक गिरावट की उम्मीद है, जो मध्यम अवधि में धीरे-धीरे कम होती रहेगी, न कि अचानक बंद।
| महीना | रूसी क्रूड आयात (मिलियन bpd) | कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी (%) | बदलाव (महीने से महीने) |
|---|---|---|---|
| जून 2025 | 2.0+ | ~35-40 | पीक |
| नवंबर 2025 | ~1.9 | ~34 | – |
| दिसंबर 2025 | ~1.2-1.4 | ~25 | गिरावट |
| जनवरी 2026 | 1.1 | 21.2 | 23.5% कम |
| फरवरी 2026 (अनुमान) | 1.0-1.2 | ~16-20 | आगे गिरावट |
| मार्च 2026 (अनुमान) | ~0.8 | कम | सबसे कम |
रूसी तेल की छूट अब पहले जितनी नहीं रही, क्योंकि Urals और Brent के बीच डिस्काउंट घटकर 5-7 डॉलर प्रति बैरल रह गया है। भारतीय रिफाइनरियां अब सऊदी अरब, UAE और वेनेजुएला जैसे विकल्पों की ओर मुड़ रही हैं। कुछ प्रमुख रिफाइनरियों जैसे रिलायंस, IOCL और BPCL ने मार्च-अप्रैल लोडिंग वाले रूसी कार्गो ऑफर ठुकरा दिए हैं।
रूस का कहना है कि यह व्यापार वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिए जरूरी है और भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है। मॉस्को ने स्पष्ट किया कि ट्रंप के अलावा किसी ने भी भारत से रूसी तेल बंद करने की पुष्टि नहीं की है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए विविध स्रोतों से आयात बढ़ा रहा है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित रहे और कीमतें नियंत्रित रहें।
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