“देश की सबसे बड़ी स्टॉक एक्सचेंज NSE के लंबे समय से लंबित IPO को एक बार फिर कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट में SEBI द्वारा जारी नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है, जिसमें पूर्व न्यायिक अधिकारी द्वारा दावा किया गया है कि NOC जारी करने में नियमों का उल्लंघन हुआ है। यह घटना NSE के IPO प्रक्रिया को और विलंबित कर सकती है, जबकि SEBI ने जनवरी 2026 में NOC प्रदान किया था।”
NSE IPO की लिस्टिंग में नई कानूनी बाधा
भारत की प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO पिछले एक दशक से अधिक समय से लंबित है। अब इस प्रक्रिया में नई अड़चन आ गई है। फरवरी 2026 की शुरुआत में दिल्ली हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल की गई, जिसमें SEBI द्वारा 30 जनवरी 2026 को जारी नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता केसी अग्रवाल, जो 72 वर्षीय पूर्व न्यायिक अधिकारी और नई दिल्ली निवासी हैं, ने 10 फरवरी 2026 को यह याचिका दायर की। याचिका में मुख्य रूप से NSE के डेरिवेटिव ट्रेड्स में कॉर्पोरेट एक्शन एडजस्टमेंट (Corporate Action Adjustments – CAA) फ्रेमवर्क के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि SEBI ने ऐसे उल्लंघनों के बावजूद NOC जारी कर दिया, जो निवेशकों के हितों के खिलाफ है और पारदर्शिता की कमी दर्शाता है।
याचिका में आगे कहा गया है कि SEBI की मंजूरी से पहले लंबित वैधानिक कमियां, फंड फ्लो में पारदर्शिता की कमी और सिस्टेमिक जोखिम जैसे मुद्दे अनसुलझे हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि NOC पर अंतरिम रोक लगाई जाए ताकि सार्वजनिक निवेशकों को अपूरणीय क्षति से बचाया जा सके। साथ ही, नियामकीय जवाबदेही और SEBI के सर्कुलर-आधारित कर्तव्यों के प्रवर्तन की मांग की गई है।
यह याचिका NSE के IPO को फिर से विलंबित करने की आशंका पैदा कर रही है। NSE ने SEBI से NOC मिलने के बाद बोर्ड मीटिंग में IPO को मंजूरी दी थी और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से लिस्टिंग की योजना बनाई है। बोर्ड ने IPO कमिटी भी गठित की है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व LIC MD Tablesh Pandey कर रहे हैं। NSE ने IPO प्रक्रिया के लिए मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने और ड्राफ्ट लिस्टिंग डॉक्यूमेंट तैयार करने की अनुमति प्राप्त कर ली थी। स्रोतों के अनुसार, NSE DRHP अप्रैल तक फाइल कर सकता है और IPO दिवाली के आसपास लॉन्च हो सकता है, जिसमें लगभग 2.5% OFS प्रस्तावित है।
हालांकि, यह नई याचिका प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई जल्द करने वाली है, संभवतः फरवरी के मध्य या अंत में। कोर्ट का फैसला NSE की लिस्टिंग टाइमलाइन पर निर्णायक प्रभाव डालेगा।
पिछले कुछ वर्षों में NSE का IPO कई चुनौतियों से गुजरा है, जिसमें को-लोकेशन मामले, नियामकीय जांच और पुरानी याचिकाएं शामिल हैं। जनवरी 2026 में SEBI NOC जारी होने से उम्मीद जगी थी कि अब लिस्टिंग निकट है, लेकिन यह नई कानूनी चुनौती बाजार में अनिश्चितता पैदा कर रही है। निवेशक और बाजार विशेषज्ञ अब कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि NSE भारत के कैपिटल मार्केट का प्रमुख स्तंभ है और इसकी सफल लिस्टिंग निवेशकों के लिए बड़ा अवसर हो सकती है।
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