“अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के सिविल फ्रॉड केस में समन स्वीकार करने पर सहमति जताई है। यह फैसला 14 महीनों की कानूनी जद्दोजहद के बाद आया, जहां भारतीय सरकार की आपत्तियों के बावजूद अमेरिकी कोर्ट ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। केस में रिश्वतखोरी का आरोप है, जिसमें अडानी ग्रीन एनर्जी ने अमेरिकी निवेशकों से 175 मिलियन डॉलर जुटाए। अब दोनों को 90 दिनों में जवाब देना होगा, जिससे केस में नया मोड़ आ सकता है।”
अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने नवंबर 2024 में गौतम अडानी और सागर अडानी पर सिविल फ्रॉड के आरोप लगाए थे, जिसमें दावा किया गया कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को सैकड़ों मिलियन डॉलर की रिश्वत देकर एक बहु-अरब डॉलर के सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट में फायदा उठाया। इस स्कीम से अडानी ग्रीन एनर्जी ने अमेरिकी निवेशकों से 175 मिलियन डॉलर से अधिक फंड जुटाए, जबकि Azure Power का स्टॉक न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड हो रहा था।
SEC की शिकायत के मुताबिक, इस रिश्वतखोरी ने दोनों कंपनियों को भारतीय सरकार से मिले प्रोजेक्ट में अनुचित लाभ दिया, जिससे निवेशकों को गुमराह किया गया। अब, ब्रुकलिन फेडरल कोर्ट में दाखिल एक फाइलिंग से पता चला कि गौतम और सागर अडानी ने अपने अमेरिकी वकीलों के माध्यम से समन स्वीकार करने पर सहमति जताई है। यह सहमति 23 जनवरी 2026 को बनी, और कोर्ट ने 30 जनवरी को इसे मंजूर कर लिया, जिससे SEC को भारतीय अधिकारियों से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ी।
इस फैसले से 14 महीनों की देरी खत्म हुई, जहां भारत सरकार ने बार-बार समन की डिलीवरी पर आपत्ति जताई थी। SEC ने जनवरी 2026 में कोर्ट से ईमेल या अमेरिकी वकीलों के जरिए सर्विस की अनुमति मांगी थी, लेकिन अब यह सहमति से हल हो गया। अडानी ग्रुप ने आरोपों से इनकार किया है, लेकिन इस कदम से केस आगे बढ़ेगा।
केस की मुख्य समयरेखा:
| घटना | विवरण |
|---|---|
| नवंबर 2024 | SEC ने गौतम अडानी, सागर अडानी और साइरिल कैबानेस पर सिविल फ्रॉड के आरोप लगाए। समानांतर में ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क के यूएस अटॉर्नी ऑफिस ने आपराधिक चार्जेस दाखिल किए। |
| दिसंबर 2024 से जनवरी 2026 | भारत सरकार ने समन की सर्विस पर आपत्तियां जताईं, जिससे प्रक्रिया में देरी हुई। |
| 23 जनवरी 2026 | अडानी की ओर से अमेरिकी वकीलों ने समन स्वीकार करने पर सहमति जताई। |
| 30 जनवरी 2026 | कोर्ट ने सहमति को मंजूर किया, सर्विस प्रक्रिया पूरी हुई। |
| अगले 90 दिन | गौतम और सागर अडानी को SEC की शिकायत पर जवाब दाखिल करना होगा। |
इस मोड़ से अडानी ग्रुप की कंपनियों पर असर पड़ सकता है, खासकर अडानी ग्रीन एनर्जी पर, जो रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में प्रमुख है। SEC की जांच में निकोलस कारासिमास, स्टीवर्ट गिलसन, क्रिस्टोफर एम. कोलोराडो और एलिसन कोन जैसे अधिकारी शामिल हैं, जो अडानी ग्रीन की गतिविधियों पर फोकस कर रहे हैं।
आरोपों के प्रमुख बिंदु:
रिश्वतखोरी: भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देकर सोलर प्रोजेक्ट हासिल करने का दावा।
निवेशक धोखा: अडानी ग्रीन ने अमेरिकी निवेशकों से फंड जुटाते समय ब्राइबरी स्कीम छिपाई।
Azure Power की भूमिका: कंपनी के एक्जीक्यूटिव साइरिल कैबानेस पर भी चार्जेस, जो NYSE पर लिस्टेड थी।
कुल प्रभाव: स्कीम से जुड़े प्रोजेक्ट की वैल्यू बहु-अरब डॉलर थी, जिससे भारतीय एनर्जी सेक्टर में हलचल मची।
अडानी ग्रुप ने बयान जारी कर कहा कि वे सभी आरोपों से इनकार करते हैं और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। इस सहमति से केस में नया दौर शुरू होगा, जहां अडानी पक्ष को सबूत पेश करने होंगे। यदि आरोप साबित हुए, तो जुर्माना और प्रतिबंध लग सकते हैं, जो ग्रुप की अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं को प्रभावित करेगा।
संभावित परिणाम और प्रभाव:
आर्थिक असर: अडानी ग्रुप की कंपनियां, जैसे Adani Enterprises और Adani Ports, स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव देख सकती हैं। हालिया ट्रेंड्स से पता चलता है कि ऐसे केसों में शेयर प्राइस 5-10% तक गिर सकती है।
कानूनी रणनीति: अडानी के वकील अब मोशन टू डिसमिस या सेटलमेंट पर फोकस कर सकते हैं, लेकिन 90 दिनों की डेडलाइन से दबाव बढ़ेगा।
भारतीय संदर्भ: यह केस भारतीय स्टार्टअप और कॉरपोरेट्स के लिए सबक है, जहां विदेशी नियामक जांच बढ़ रही है। SEBI जैसी भारतीय एजेंसियां भी समानांतर जांच कर सकती हैं।
ग्लोबल इम्प्लिकेशन: अमेरिकी निवेशकों के हितों की रक्षा से अन्य भारतीय कंपनियों पर नजर रखी जा रही है, खासकर रिन्यूएबल एनर्जी में।
इस विकास से अडानी ग्रुप की प्रतिष्ठा पर सवाल उठे हैं, लेकिन ग्रुप की ओर से जोर दिया जा रहा है कि वे पारदर्शिता बनाए रखेंगे। केस की सुनवाई न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में जारी रहेगी, जहां SEC की टीम मजबूत सबूत पेश करने की तैयारी में है।
अडानी ग्रुप की प्रमुख कंपनियां और उनका स्टेटस:
| कंपनी | सेक्टर | हालिया विकास |
|---|---|---|
| Adani Green Energy | रिन्यूएबल एनर्जी | SEC जांच के केंद्र में, 175 मिलियन डॉलर फंडिंग पर सवाल। |
| Adani Enterprises | विविध | स्टॉक में अस्थिरता, लेकिन ग्रोथ प्रोजेक्ट्स जारी। |
| Adani Ports | पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स | अंतरराष्ट्रीय विस्तार, लेकिन केस से प्रभावित हो सकता है। |
| Azure Power | सोलर एनर्जी | NYSE पर ट्रेडिंग, ब्राइबरी स्कीम में शामिल होने का आरोप। |
यह केस भारतीय बिजनेस लीडर्स के लिए चेतावनी है कि अमेरिकी बाजार में पारदर्शिता जरूरी है। अडानी की सहमति से अब फोकस सबूतों और जवाब पर शिफ्ट हो गया है, जो आने वाले महीनों में और खुलासे ला सकता है।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट स्रोतों पर आधारित है।