“अगर आप अपना बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो सरकार की ये 5 प्रमुख योजनाएं लाखों रुपये तक की फंडिंग, सब्सिडी और आसान लोन उपलब्ध कराती हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से 20 लाख तक बिना गारंटी लोन, स्टार्टअप इंडिया से सीड फंडिंग और टैक्स छूट, पीएमईजीपी से 35% तक सब्सिडी, स्टैंड अप इंडिया से एससी/एसटी/महिलाओं को 1 करोड़ तक का लोन, और क्रेडिट गारंटी स्कीम से कोलैटरल-फ्री फंडिंग—ये स्कीम्स नए उद्यमियों के लिए 2026 में सबसे मजबूत सहारा हैं।”
खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए सरकारी योजनाओं का पूरा गाइड
भारत में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने कई प्रभावी योजनाएं चलाई हैं, जो नए उद्यमियों को पूंजी, सब्सिडी और आसान प्रक्रिया प्रदान करती हैं। 2026 में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बढ़ रहा है, जहां 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स रजिस्टर्ड हैं और ये 21 लाख से ज्यादा रोजगार दे चुके हैं। यहां 5 प्रमुख योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई है, जो विभिन्न स्तर के बिजनेस के लिए फंडिंग सुनिश्चित करती हैं।
1. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) यह योजना गैर-कॉरपोरेट, गैर-कृषि छोटे व्यवसायों के लिए बिना कोलैटरल के लोन उपलब्ध कराती है। 2026 में लोन लिमिट बढ़ाकर 20 लाख रुपये तक कर दी गई है, खासकर तरुण प्लस कैटेगरी में।
कैटेगरी : शिशु (50,000 रुपये तक), किशोर (50,001 से 5 लाख तक), तरुण (5 लाख से 10 लाख तक), तरुण प्लस (10 लाख से 20 लाख तक)।
विशेषताएं : कोई गारंटी नहीं, महिलाओं और नए उद्यमियों को प्राथमिकता। मुद्रा कार्ड से क्रेडिट लाइन मिलती है, जिससे कच्चा माल और अन्य खर्च आसानी से हो सकते हैं।
लाभ : अब तक करोड़ों उद्यमियों को फंडिंग मिल चुकी है, जिसमें 40% से ज्यादा महिलाएं लाभान्वित हैं। यह योजना छोटे दुकानदारों, सर्विस प्रोवाइडर्स और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए आदर्श है।
2. स्टार्टअप इंडिया योजना 2016 में शुरू हुई यह योजना अब एक दशक पूरा कर चुकी है और 2026 में डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रावधान हैं। टर्नओवर लिमिट 200 करोड़ रुपये तक बढ़ा दी गई है (डीप टेक के लिए 300 करोड़)।
फंडिंग विकल्प : स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS) से 945 करोड़ रुपये का कोष, जिसमें प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट, प्रोटोटाइप और मार्केट एंट्री के लिए ग्रांट/इक्विटी मिलती है।
नई अपडेट : स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 से 10,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कोष, जो डीप टेक, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन पर फोकस करता है।
अन्य लाभ : पहले 3 साल टैक्स छूट, आसान कंप्लायंस, सेल्फ-सर्टिफिकेशन और क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स (CGSS) से कोलैटरल-फ्री लोन। यह योजना टेक-बेस्ड, इनोवेटिव बिजनेस के लिए सबसे उपयुक्त है।
3. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) यह क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना नए माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए है, जो गैर-कृषि सेक्टर में रोजगार पैदा करती है।
प्रोजेक्ट लिमिट : मैन्युफैक्चरिंग में 50 लाख रुपये तक, सर्विस/बिजनेस सेक्टर में 20 लाख रुपये तक।
सब्सिडी : जनरल कैटेगरी में ग्रामीण क्षेत्रों में 25%, शहरी में 15%; स्पेशल कैटेगरी (एससी/एसटी/महिलाएं/ओबीसी/पूर्व सैनिक) में ग्रामीण में 35%, शहरी में 25%।
विशेषताएं : सब्सिडी बैंक लोन पर मार्जिन मनी के रूप में मिलती है, जो 3 साल तक TDR में रखी जाती है। यह योजना पारंपरिक कारीगरों, ग्रामीण उद्यमियों और छोटे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए बेहतरीन है।
4. स्टैंड अप इंडिया योजना एससी/एसटी और महिला उद्यमियों को ग्रीनफील्ड एंटरप्राइजेज के लिए बैंक लोन उपलब्ध कराती है।
लोन रेंज : 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक।
उद्देश्य : हर बैंक ब्रांच में कम से कम एक एससी/एसटी और एक महिला उधारकर्ता को फायदा।
क्षेत्र : मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज, ट्रेडिंग या एग्री-एलायड एक्टिविटीज।
लाभ : नए प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष फोकस, जो महिलाओं और वंचित वर्गों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाता है। यह योजना इंक्लूसिव ग्रोथ पर जोर देती है।
5. क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स (CGSS) / CGTMSE स्टार्टअप्स और एमएसएमई के लिए कोलैटरल-फ्री क्रेडिट गारंटी प्रदान करती है।
कवरेज : स्टार्टअप इंडिया रिकग्नाइज्ड स्टार्टअप्स को विशेष गारंटी, एनसीजीटीसी द्वारा मैनेज।
लाभ : बैंकों को जोखिम कम होने से लोन आसानी से मिलता है, छोटे उद्यमियों को बिना संपत्ति गिरवी रखे फंडिंग। यह योजना फंडिंग एक्सेस को आसान बनाती है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास कोलैटरल नहीं है।
ये योजनाएं मिलकर नए उद्यमियों को पूंजी की कमी दूर करने में मदद करती हैं। आवेदन के लिए संबंधित पोर्टल जैसे startupindia.gov.in, mudra.org.in, kviconline.gov.in या बैंक ब्रांच से संपर्क करें। सही योजना चुनकर और आवश्यक दस्तावेज तैयार करके आप आसानी से फंडिंग प्राप्त कर सकते हैं।